भारत का राष्ट्रपति देश में सर्वोच्च पदाधिकारी होता है साथ ही उसको देश का प्रथम नागरिक भी कहा जाता है | भारतीय संविधान के अनुच्छेद 52 के अनुसार भारत में एक राष्ट्रपति होगा| वर्तमान में राष्ट्रपति को मिलने वाले वेतन एवं भत्ते इस प्रकार हैं :
वेतन: RS. 1.5 लाख प्रतिमाह +
अन्य भत्ते जिसमे नि: शुल्क चिकित्सा + आवास +
नि: उपचार की सुविधा (पूरी जिंदगी) प्रदान की जाती हैं |
इन सब सुविधाओं के अतिरिक्त राष्ट्रपति के आवास, स्टाफ, खाना और मेहमान नवाजी जैसे अन्य खर्चों पर भारत सरकार सालाना 22.5 करोड़ रुपये खर्च करती है|
जैसा कि ऊपर बताया गया है कि राष्ट्रपति देश का सर्वोच्च नागरिक होता है लेकिन क्या आपको यह बात पता है कि इस समय राष्ट्रपति को मिलने वाली सैलरी किसी एक पदाधिकारी से भी कम हो गई है| दरअसल सातवें वेतन आयोग के लागू होने के साथ कैबिनेट सचिव को हर माह 2.5 लाख रुपये और केंद्र सरकार में सचिव की सैलरी 2.25 लाख प्रति महीने हो गयी है जबकि वर्तमान में राष्ट्रपति को केवल 1.5 लाख प्रति माह मिलते हैं इस प्रकार केंद्र के एक कर्मचारी का वेतन राष्ट्रपति के वेतन से भी 1 लाख रुपये अधिक हो गया है जो कि देश राष्ट्रपति के पद की प्रतिष्ठा को देखते हुए ठीक नही कहा जा रहा है |
अब कितनी हो जायेगी राष्ट्रपति की सैलरी
अब इस परिस्थिति को सुलझाने के लिए राष्ट्रपति के वेतन में 200% से ज्यादा की बढ़ोतरी होगी और अब राष्ट्रपति की सैलरी 1.5 लाख रुपये प्रतिमाह से बढ़कर 5 लाख रुपये प्रतिमाह हो जाएगी| राष्ट्रपति को सेवानिवृत्ति के बाद 1.5 लाख रुपये की पेंशन मिलेगी| उपराष्ट्रपति की सैलरी 1.25 लाख रुपये प्रतिमाह से बढ़कर 3.5 लाख रुपये हो जाएगी| राष्ट्रपति के जीवनसाथी को 30,000 रुपये महीने की सेक्रेटेरियल सहायता मिलेगी| इसके साथ ही पूर्व राष्ट्रपतियों, मृत राष्ट्रपतियों की पत्नियों, पूर्व उपराष्ट्रपतियों, मृत उपराष्ट्रपतियों की पत्नियों और पूर्व राज्यपालों के पेंशन में बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा सकता है|
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश के दो सर्वोच्च पदाधिकारियों के वेतन में वृद्धि का प्रस्ताव तैयार कर लिया है| कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही इस बिल को संसद के अगले सत्र के दौरान पेश किए जाने की उम्मीद है|
पिछली बार कब बढाई गई थी सैलरी
इससे पहले 2008 में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यपाल की सैलरी में तीन गुना बढ़ोतरी की गई थी| इससे पहले तक राष्ट्रपति का वेतन 50 हजार रुपये, उपराष्ट्रपति का वेतन 40 हजार रुपये और राज्यपालों का वेतन 36 हजार रुपये प्रतिमाह था|
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